Thursday, 21 May 2015


अजन्मी मौत 

अभी मैं चार माह की हूँ
इंतज़ार है जब नौ की हो जाऊँगी
खेलूंगी माँ की गोद में
झूमूंगी बाबा के प्यार में
सिमटी सहमी  सिकुड़ी
मैं गर्भ में सोती रही
दुनियां में आने के ख़्वाब आँखों में  संजोती रही
हूँ अभी आधी अधूरी
कब बनूँगी बिटिया प्यारी
नन्ही गुड़िया कह कर वो मुझे पुकारेंगे
सोच के मैं पुलकित होती कितना मुझे दुलारेंगे
मेरी बेटी होने का जब उन्हें पता चला
थोड़ी सी भी दया न आई
मुझे मिटने का निर्णय लिया
पहले मेरा पैर काटा
फिर काटा हाथ
छोटे छोटे टुकड़े कर दिए
फिर ली राहत की सांस
याद नही उसे सत्य आपने अस्तित्व का
जिस गर्भ से उसने जनम लिया वो गर्भ भी मैं ही थी
आज जिस गर्भ में मुझे मार रहे वो गर्भ भी मैं ही हूँ
कल जिस गर्भ से दुनिया चलेगी वो गर्भ भी मैं ही हूँ 


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