Sunday, 24 May 2015




मेरी मर्जी का न कोई दिन और कोई रात नहीं A
हम मूरत बन बैठे हैं] जैसे हम में कोई ज़ज्बात नहींA
मेरी मर्जी......... 
जाने कब से तरसते हैं] खुशियों के लिए
उम्र बीत गयी खुशियों] से मुलाकात नहीं
मेरी मर्जी.........  
आदत सी हो गई] झुककर चलने की
लगता है ज़माने में] मेरी कोई औकात नहीं।
मेरी मर्जी.........  
हर रंग से भर दिया] दमन उनका
खेल किस्मत का] मेरे हिस्से में कोई सौगात नहीं।
मेरी मर्जी.........  


मुझे मीठा पसंद है 
पर नमकीन भी खाना पड़ता है 
खट्टा खाकर भी मुस्कुराना पड़ता है 
जीभ के लिए खाते नही हम 
इस पेट के खातिर सब चबा कर पचना पड़ता है



 बचपन बचा लो 


बचपन बचालो मेरा माँ मैं भी खेलना चाहता हूँ 
चप्पल की मार अब नही झेलना चाहता हूँ 
बचपन बचा ............
दम  घुट रहा है मेरा 
मैं बोझ के नीचे  दबा जा रहा हूँ 
पढ़ना  चाहता हूँ मैं भी 
पर पोछे  संग घिसा जा रहा हूँ 
बचपन बचा लो........
वो नही समझेंगे दर्द मेरा 
जो मेरे खरीददार हैं 
माँ तुम यह न कहना 
गरीबी के आगे हम भी लचर हैं 
बचपन बचा लो..........


Thursday, 21 May 2015


अजन्मी मौत 

अभी मैं चार माह की हूँ
इंतज़ार है जब नौ की हो जाऊँगी
खेलूंगी माँ की गोद में
झूमूंगी बाबा के प्यार में
सिमटी सहमी  सिकुड़ी
मैं गर्भ में सोती रही
दुनियां में आने के ख़्वाब आँखों में  संजोती रही
हूँ अभी आधी अधूरी
कब बनूँगी बिटिया प्यारी
नन्ही गुड़िया कह कर वो मुझे पुकारेंगे
सोच के मैं पुलकित होती कितना मुझे दुलारेंगे
मेरी बेटी होने का जब उन्हें पता चला
थोड़ी सी भी दया न आई
मुझे मिटने का निर्णय लिया
पहले मेरा पैर काटा
फिर काटा हाथ
छोटे छोटे टुकड़े कर दिए
फिर ली राहत की सांस
याद नही उसे सत्य आपने अस्तित्व का
जिस गर्भ से उसने जनम लिया वो गर्भ भी मैं ही थी
आज जिस गर्भ में मुझे मार रहे वो गर्भ भी मैं ही हूँ
कल जिस गर्भ से दुनिया चलेगी वो गर्भ भी मैं ही हूँ 


Wednesday, 20 May 2015


घुटन 

एक तमन्ना ने ली अंगड़ाई 
मैं झूम उठी 
पर उसे बर्दास्त नही हुआ 
कुचल डाला 
मैं रोई 
रोती  रही 
आंसूओ से धो डाला  
और फिर से चहकने लगी 
एक तमन्ना फिर से जागी 
उसे भी कुचल डाला 
रोई, फिर से आपने घाव धोई 
 एक के बाद एक तमन्ना 
दाम तोड़ती गई 
दफ़न होती गई 
उस दफ़न की सड़न 
जिंदगी की घुटन बन गई है 



कलह 

तब तब हुआ
घर में कलह
जब जब मैंने
आपने होने का एहसास दिलाया
इंसान हूँ मैं भी
ये सवाल उठाया
मेरा होना उन्हें
बर्दाश्त नही होता
वो कहते हैं खुलेआम
मैं किसी की बहन हूँ
बेटी हूँ
और हूँ बीबी
पर मैं मैं नही हूँ
जब तक मेरे अन्दर
मेरे होने का एहसास रहेगा
तब तक घर में कलह चलेगा